Why Mukesh Khanna is seen less on screen? He Never Begs for Roles

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Why Mukesh Khanna is invisible on Small Screen Now-a-Days? He has tried to answer it in a Post at Instagram. Mukesh Khanna, the actor who played Bhishma Pitamah of Mahabharata and Shaktimaan, the first super hero of Indian TV. Mukesh’s name is still famous in the film and TV world and his discussions are still there.

Mukesh is quite active on social media. In such a situation, they keep posting posts related to some show or their film and people like and share their posts as well as comment on them. One such person commented on Mukesh and raised questions, which he has now answered.

Mukesh told that a man had asked him not to ask for work and to come out of Shaktimaan’s hangover. He has answered this in a long post and has also shared many photos of his shows and films. 

Why Mukesh Khanna is seen less on screen?

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किसी ने अपने कामेंट्स में मुझ पर कटाक्ष किया है कि में अपने पितामह शक्तिमान के हैंगओवर से बाहर निकलूँ। कि मैं अपनी ना माँगने की आदत से बाहर निकलूँ ताकि मुझे और अच्छे रोल्ज़ मिल सके।मेरा जवाब था माँगना मेरी फ़ितरत में नहीं।उसने कहा माँगने में क्या शर्म। बड़े बड़े ऐक्टर माँगते हैं। उसने चंद बड़े ऐक्टर्ज़ का नाम लिया ये भी काम माँगते है। उस महाशय के माध्यम से आज मैं आप सभी को ये कहना चाहूँगा, बात शर्म की नहीं, सोचने के अन्दाज़ की है।मैंने आज तक किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।६० फ़िल्मे बिन माँगे की हैं।मैं इतना भी बुरा ऐक्टर नहीं कि मुझे रोल्ज़ ऑफ़र ना हों। समस्या ये है मैं ओवर चूज़ी हूँ।मैं अपने ज़मीर की, अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनता हूँ।मैं वही रोल करता हूँ जो मुझे संतुष्टि दे।मैं पैसों के लिए रोल्ज़ नहीं करता।मुझे पता है कि मैं विलेन के लिए हाँ कह दूँ तो निर्माताओं की लाइन लग जाए। पर मेरी अंतरात्मा मुझे इसकी इजाज़त नहीं देता। एक घटना बताऊँ तो आपको मेरी बात पूरी तरह से समझ आ जाएगी। अमरीश जी के चौथे में हम सब शांत बैठे थे। मेरे सेक्रेटेरी ने मुझे धीरे से कहा प्रेस में एक नोट डाल दो कि अमरीशजी का रेप्लेस्मेंट आप हो। मैंने हैरान हो कर कहा अभी चार दिन भी नहीं हुए उनकी डेथ को और आप ऐसी घटिया बात बोल रहे हो। अमरीशजी ग्रेट ऐक्टर थे।मैं उनकी बराबरी नहीं कर सकता।९० प्रतिशत से ज़्यादा उनके रोल्ज़ नेगेटिव थे जो मैं १०० प्रतिशत नहीं कर सकता।मैं इस लिए काम नहीं माँगता क्योंकि देने वाले जब देंगे तो मुझे रोल करना पड़ेगा चाहे वो नेगेटिव हो या पॉज़िटिव।क्योंकि आपने माँगा था। हाथ आपने फैलाया था। मैं करोड़ों कमाने के लिए रोल नहीं करता। मैं दूसरों के लिए नहीं अपने लिए रोल करता हूँ। मैं वो रोल करता हूँ जो मेरे अंदर से निकलता है। इसलिए शायद अच्छा करता हूँ। मैं अंत में उस महाशय से कहना चाहूँगा कि सच है मैं फ़िल्मों में कम दिखता हूँ। लेकिन जब दिखता हूँ , तो सचमुच दिखता हूँ।

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किसी ने अपने कामेंट्स में मुझ पर कटाक्ष किया है कि में अपने पितामह शक्तिमान के हैंगओवर से बाहर निकलूँ। कि मैं अपनी ना माँगने की आदत से बाहर निकलूँ ताकि मुझे और अच्छे रोल्ज़ मिल सके।मेरा जवाब था माँगना मेरी फ़ितरत में नहीं।उसने कहा माँगने में क्या शर्म। बड़े बड़े ऐक्टर माँगते हैं। उसने चंद बड़े ऐक्टर्ज़ का नाम लिया ये भी काम माँगते है। उस महाशय के माध्यम से आज मैं आप सभी को ये कहना चाहूँगा, बात शर्म की नहीं, सोचने के अन्दाज़ की है।मैंने आज तक किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।६० फ़िल्मे बिन माँगे की हैं।

मैं इतना भी बुरा ऐक्टर नहीं कि मुझे रोल्ज़ ऑफ़र ना हों। समस्या ये है मैं ओवर चूज़ी हूँ।मैं अपने ज़मीर की, अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनता हूँ।मैं वही रोल करता हूँ जो मुझे संतुष्टि दे।मैं पैसों के लिए रोल्ज़ नहीं करता।मुझे पता है कि मैं विलेन के लिए हाँ कह दूँ तो निर्माताओं की लाइन लग जाए। पर मेरी अंतरात्मा मुझे इसकी इजाज़त नहीं देता। एक घटना बताऊँ तो आपको मेरी बात पूरी तरह से समझ आ जाएगी। अमरीश जी के चौथे में हम सब शांत बैठे थे। मेरे सेक्रेटेरी ने मुझे धीरे से कहा प्रेस में एक नोट डाल दो कि अमरीशजी का रेप्लेस्मेंट आप हो।

मैंने हैरान हो कर कहा अभी चार दिन भी नहीं हुए उनकी डेथ को और आप ऐसी घटिया बात बोल रहे हो। अमरीशजी ग्रेट ऐक्टर थे।मैं उनकी बराबरी नहीं कर सकता।९० प्रतिशत से ज़्यादा उनके रोल्ज़ नेगेटिव थे जो मैं १०० प्रतिशत नहीं कर सकता।मैं इस लिए काम नहीं माँगता क्योंकि देने वाले जब देंगे तो मुझे रोल करना पड़ेगा चाहे वो नेगेटिव हो या पॉज़िटिव।क्योंकि आपने माँगा था। हाथ आपने फैलाया था। मैं करोड़ों कमाने के लिए रोल नहीं करता। मैं दूसरों के लिए नहीं अपने लिए रोल करता हूँ। मैं वो रोल करता हूँ जो मेरे अंदर से निकलता है। इसलिए शायद अच्छा करता हूँ। मैं अंत में उस महाशय से कहना चाहूँगा कि सच है मैं फ़िल्मों में कम दिखता हूँ। लेकिन जब दिखता हूँ , तो सचमुच दिखता हूँ।

Somebody has sarcastically told me in my comments that I should get out of the hangover of my Pitamah Shaktimaan. That I get out of my habit of not asking so that I can get more good roles. My answer was not in my nature to ask. She said what a shame to ask. They ask for great actors. He took the name of a few big actors, they also ask for work. Today I would like to say to all of you through that monstrosity, it is not a matter of shame, it is a way of thinking. I have not spread my hand to anyone till date.

I listen to my conscience, my conscience. I roll what gives me satisfaction. I don’t roll for money. I know if I say yes to Villain. May the manufacturers line up. But my conscience does not allow me to. If I tell an incident, you will understand my point completely. In Amrish ji’s fourth we were all sitting silent. My secretary gently told me to put a note in the press that you should be represented by Amrishji. I was surprised to say that it was not even four days to his death and you are talking such a cheap thing. Amrishji was a great actor. I cannot match him. More than 90 percent of his roles were negative, which I cannot do 100 percent. I do not ask for work because when the givers give, I have to roll whether it is negative or positive. Because you asked for it. You spread your hand. I do not roll to earn crores. I roll for myself, not for others. I roll what comes out of me. So maybe I do well. In the end, I would like to say to that sir that I am less visible in films. But when I look, I really look.

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